‘दो मिनट में 30 उठक-बैठक लगाइए, और मास्को मेट्रो में मुफ्त यात्रा करिए’. इस तरह के कैप्शन के साथ एक वीडियो सोशल मीडिया पर फिर वायरल है. लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं. उनका कहना है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से ये अच्छा फैसला है.इस वीडियो में एक आदमी टिकट वेंडिंग मशीन के सामने उठक-बैठक लगा रहा है. और फिर मशीन से टिकट लेकर जाता हुआ दिखाई देता है

ticket vending  machine with squatting sensor at Vystavochnaya  metro station, russia ( screen shot)
मास्को के एक मेट्रो स्टेशन पर लगी ticket vending machine का स्क्रीन शॉट

26 जुलाई को इस पोस्ट को ट्वीट किया गया. इसका आर्काइव्ड वर्ज़न आप यहां देख सकते हैं. अलग-अलग यूज़र के अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने फेसबुक पेज और वेबसाइट पर भी इसे पोस्ट किया.

screen shot of a post of toi facebook page about free moscow metro for 30 squatting on 27 july 2019
टाइम्स ऑफ इंडिया के फेसबुकक पेज पर 27 जुलाई 2019 को पोस्काट की गई रिपोर्ट का स्क्रीन शॉट

टाइम्स ऑफ इंडिया के आर्काइव्ड वर्जन को आप यहां देख सकते हैं. इस महीने की शुरुआत में भी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी.

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मॉस्को में मुफ्त मेट्रो का FACT CHECK

साधारण गूगल सर्च में ‘free ticket for moscow metro’ की-वर्डस डालने से ही कई रिपोर्टस दिखाई देती है. इन रिपोर्टस में बताया गया है कि रशिया में फऱवरी 2014 के विंटर ओलंपिक के लिए एक प्रमोशनल कैंपेन का हिस्सा था ये वीडियो. इसका मकसद लोगों के बीच फिटनेस की जागरुकता फैलाना था. इसे लोगों ने काफी पसंद किया था. इस कैंपेन के तहत इस सेंसर युक्त वेंडिग मशीन को मॉस्को के  Vystavochnaya स्टेशन पर लगाया गया था. यहां कोई भी व्यक्ति मशीन के सामने अगर 2 मिनट में 30 उठक-बैठक लगाता तो मशीन उसे मेट्रो का मुफ्त टिकट देती थी.

8 नवंबर 2013 को Vystavochnaya स्टेशन प विशेष squatting सेंसर वाली टिकट वेंडिग मशीन का उदघाटन

ये व्यवस्था सिर्फ दिसंबर 2013 तक ही थी. इस वीडियो को आप नीचे देख सकते हैं जिसे 8 नवंबर 2013 को अपलोड किया गया था. टाइम्स ऑफ इँडिया ने इस बात का कहीं जिक्र नहीं किया कि इसे क्यों और कब शुरू किया गया था. पांच साल से भी ज़्यादा पुरानी खबर को आज शेयर करने का कोई मतलब नहीं बनता. इस वीडियो को आझ के संदर्भ में शेयर किया गया जो पूरी तरह से गलत है. हालांकि बाद में इस खबर को अपनी वेबसाइट और फेसबुक पेज से हटा लिया है.

निष्कर्ष

हमने अपनी जांच में पाया कि ये वीडियो कई बार वायरल हो चुका है. वीडियो में किसी तरह की कांट-छांट नहीं की गई है. ये पूरी तरह सही है. लेकिन 5 साल से भी ज्यादा पुराना है.इसलिए बिना ये बताए कि ये वीडियो पांच साल पुराना है इस फेक न्यूज़ की श्रेणी में ही रखा जाएगा. और जब टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे अखबार इतनी पुरानी खबर को इस तरह दिखाएं जैसे आज की हो तो ये और भी गंभीर है.

दावा- 2 मिनट में 30 उठक-बैठक लगाइये और मॉस्को मेट्रो में मुफ्त यात्रा करिये

दावा करने वाले- टाइम्स ऑफ मीडिया, सोशल मीडिया यूज़र

सच- दावा झूठा है. वीडियो पांच साल से भी ज़्यादा पुराना है.

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