The NewYork Times की वायरल तस्वीर

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘The New York Times’  कश्मीर को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है. कहा जा रहा 27 सितंबर को अखबार के पूरा फ्रंट पेज पर कश्मीर के हालात पर रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी. अखबार के फ्रंट पेज के रूप में इसे सोशल मीडिया पर भी शेयर किया जा रहा है.

इस तस्वीर में कुछ हेडलाइंस इस तरह से हैं ‘Kashmir #EndTheSiege 8 Million under siege’ और ‘The seizing of Kashmir is blatant racism’. इसे कश्मीर में अत्याचार के रूप में शेयर किया जा रहा है.

गौरतलब है 27 सितंबर को ही युनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में पीएम मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भाषण भी हुआ था. न्यूज एजेंसी ANI ने इसे न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित विज्ञापन बताते हुए इस पर सवाल उठाए थे. ANI की इस रिपोर्ट को कई अखबारों ने भी प्रकाशित किया था.

लेकिन सोशल मीडिया पर इसे रिपोर्ट बताकर शेयर करने का सिलसिला जारी है.

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फैक्ट चेक

इस इमेज को गौर से देखने पर पता चलता है कि ये पेज अखबार के फ्रंट पेज के ऊपर है. इस पर अखबार का मास्ट हेड ‘The New York Times’ नहीं है. पेज के बिल्कुल नीचे बाईं तरफ लिखा है Sponsored by ‘International Humanitarian Foundation Inc’. साथ में वेबसाइट की जानकारी भी दी गई है. नीचे दो स्क्रीन शॉट में आप इसे देख सकते हैं

एक तस्वीर में विज्ञापन देने वाले का नाम सबसे नीचे लिखा है,दूसरी में विज्ञापन वाला पेज अखबार के फ्रंट पेज के ऊपर से रखा हुआ है
एक तस्वीर में विज्ञापन देने वाले का नाम सबसे नीचे लिखा है,दूसरी में विज्ञापन वाला पेज अखबार के फ्रंट पेज के ऊपर से रखा हुआ है

इस वेबसाइट पर जाने पर पता चलता है कि 22 सितंबर को नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को ऑरगेनाइज करने में सहयोग भी किया था. नीचे 27 सितंबर को प्रकाशित ‘The New York Times’ का फ्रंट पेज आप देख सकते हैं.

27-28 सितंबर को प्रकाशित न्यूयॉर्क टाइम्स के फ्रंट पेज का स्क्रीन शॉट
27-28 सितंबर को प्रकाशित न्यूयॉर्क टाइम्स के फ्रंट पेज का स्क्रीन शॉट

निष्कर्ष

‘The New York Times’ ने कश्मीर के बारे में 27 सितंबर अखबार के फ्रंट पेज पर कोई रिपोर्ट नहीं प्रकाशित की है. विज्ञापन को फ्रंट पेज की रिपोर्ट बताकर शेयर किया जा रहा है.

दावा- ‘The New York Times’ ने 27 सितंबर को अपने फ्रंट पेज पर कश्मीर में अत्याचार की रिपोर्ट प्रकाशित की है

दावा करने वाले- सोशल मीडिया यूज़र

सच- दावा गलत है. ये रिपोर्ट नहीं विज्ञापन है.

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