रेप करने वालों को 3 से 30 दिन के भीतर फांसी के प्रधानमंत्री के दावे का मतलब

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सूरत में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि रेप की घटनाएं पहले भी होती थीं और अब भी होती हैं, इनको सुनकर शर्म से माथा झुक जाता है लेकिन अब आज अपराधियों को 3, 7, 11 और 30 दिनों के भीतर फांसी दे दी जाती है। इसे आप नीचे दिए गए लिंक पर 28:30-30:40 के बीच सुन सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने किन शब्दों में ये बात कही आपको बताते हैं

‘इस देश में बलात्कार पहले भी होते थे , समाज की इस इस बुराई का कलंक ऐसा है कि
आज भी उस घटनाओं को सुनने में मिलता है माथा शर्म से झुक जाता है,दर्द होता है लेकिन आज 3 दिन में फांसी ,7 दिन में फांसी 11 दिन में फांसी, 1 महीने में फांसी। लगातार…उन बेटियों को न्याय दिलाने के लिए एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं नतीजे नज़र आ रहे हैं। लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि बलात्कार की घटना 7 दिन तक टीवी पर चलाई जाती है लेकिन फांसी की सज़ा की ख़बर आकर के चली जाती है।फांसी की खबर जितना ज़्यादा फैलेगी उतना बलात्कार करने की विकृति लिए बैठा व्यक्ति डरेगा 50 बार सोचेगा”

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूरत में कारोबारियों को संबोधित करते हुए (28:30-30:40) के बीच रेप की घटनाओं पर दावा

प्रधानमंत्री के इस दावे को बीजेपी ने अपने ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया।

नयूज़ एजेंसी एएनआई ने भी इस बात को कुछ इस तरह से ट्वीट किया कि जैसे प्रधानमंत्री ने कहा हो कि रेप के दोषियों को 3 से 30 दिन के भीतर फांसी पर लटका दिया जाता है

ani के इस ट्वीट का हिंदी में अनुवाद का मतलब है


सूरत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: देश में बलात्कार पहले भी होते थे , समाज की इस इस बुराई का कलंक ऐसा है कि
आज भी ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं ये शर्म की बात है। लेकिन अब अपरादियों को 3 दिन में ,7 दिन में, 11 दिन में औऱ 1 महीने में फांसी पर लटका दिया जाता है।बेटियों को न्याय दिलाने के लिए एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं नतीजे नज़र आ रहे हैं।

एएनआई के ट्वीट में अपराधियों को फांसी पर लटकाने की बात प्रधानमंत्री की तरफ से कही गई है। बीजेपी के ट्वीट को अगर ध्यान से देखें तो उससे ये ज़ाहिर होता है कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि 3 से 30 दिन में अपराधियों को फांसी होती है। इसमें कहीं ये नही लिखा है कि फांसी की सज़ा सुनाई जाती है। हालांकि प्रधानमंत्री ने भी मुख्य रूप से यही कहा कि ”3 दिन में फांसी, 7 दिन में फांसी,11 दिन में फांसी, 1 महीने में फांसी लगातार” लेकिन बाद में वो जिक्र करते हैं कि टीवी पर फांसी की सज़ा की खबर आकर चली जाती है। अपराधियों को फांसी और टीवी पर फांसी की सज़ा दो अलग अलग संदर्भ हैं। हम यहां इस बात का विश्लेषण इसलिए कर रहे हैं कि फांसी की सज़ा औऱ फांसी दिए जाने या होने में बड़ा अंतर है। एनआई, बीजेपी के ट्वीट और इस मसले पर प्रधानमंत्री के कथन के मुख्य अंश से यही समझ में आता है कि बात फांसी दिए जाने को लेकर है।

इसे ले कर तमाम ट्विटर यूज़र ने भी सवाल उठाए


LIE! Name one rapist who has been hung in your term, Sir. Nirbhaya’s rapists, Asifa’s rapists, even Unnao child-rape-accused BJP MLA Sengar are still alive and well.@narendramodi ji, we know elections are near, but don’t turn the pain of Indian women & girls into propaganda. 🙏🏽 https://t.co/rJuMMJNef8— VISHAL DADLANI (@VishalDadlani) January 30, 2019





आइए जानते हैं कि सच क्या है?

रेप के मामले में आखिरी फांसी 2004 यानि 14 साल पहले दी गई थी। धनंजय चटर्जी नामके व्यक्ति को तब फांसी दी गई थी।


अप्रैल 2018 में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार के मामले में फांसी की सज़ा देने का प्रावधान सरकार ने किया था। इसके बाद 9 लोगों को फांसी की सज़ा दी गई थी। लेकिन अभी तक इनमें से किसी को भी फांसी पर लटकाया नहीं गया है। 
गौरतलब है कि पिछले 2 सालों से एनसीआरबी ने कोई आंकड़े जारी नहीं किए हैं। ऐसे में किसी के लिए भी अधिकारिक दावा करना कि कितने मामलों मे सजा़ हुई है और कितना समय लगा संभव नहीं है।

नए दिशा निर्देश

रेप के मामलों में जांच और सुनवाई को तेज़ करने के इरादे से पिछले साल क्रिमिनल लॉ में संशोधन किया गया।

  1. रेप के सभी मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना ज़रूरी
  2. सभी रेप मामलों के ट्रायल 2 महीने के भीतर पूरा करना आवश्यक
  3. फैसले के खिलाफ अपील का निपटारा 6 महीने के भीतर होगा

 ऐसे में प्रधानमंत्री का 3 दिन से लेकर 30 दिन में रेप के आरोपी को फांसी देने के कथन के कई मतलब निकाले जा सकते हैं। अगर शब्दों पर जाएं तो अलग मतलब है औऱ अगर उनके अभिप्राय पर जाएं तो अलग मतलब है। क्योंकि देश में कई जगहों पर एक महीने में फांसी की सज़ा सुनाई गई है लेकिन फांसी पर लटकाया नहीं गया है। इन मामलों में अभी सज़ा के खिलाफ बड़ी अदालतों में अपील चल रही है। ऐसे में हमने फैक्ट चेक करके सारे तथ्य आपके सामने रख दिए हैं। किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।

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